परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
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Saturday, July 29, 2017
मनुष्य विचारों
मनुष्य विचारों से ही बना है। अगर हमारे विचार महान होंगे तो जीवन भी महान होगा। परम पूज्य सुधांशुजी महाराज |
Thursday, July 27, 2017
Friday, July 21, 2017
मानव जीवन अनमोल
मानव जीवन अनमोल है, मनुष्य से ज्यादा कीमती चीज दुनिया में कोई नहीं और मनुष्य के पास कीमती चीज है, श्वासों की पूंजी, उसका समय्।
Sunday, July 2, 2017
समय और परिस्थितियाँ
समय और परिस्थितियाँ नहीं बदलते, तुम्हें ही बदलना होगा।
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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
Wednesday, April 26, 2017
amrit vachan
वाणी को गंदा मत होने दो ,इस में भगवान का नाम बसता है ,तो वाणी को पवित्र रखो !
Muskilon mein bhag jana asaan hota hai, Har pehlu zindagi ka imtihaan hota hai.., Darne walon ko kuch milta nahi zindagi mein., Aur ladne walon k kadmon mein jahan hota hai
Udas matt ho mai tere saath hu'n!
Samne nahi par aas paas hu'n!
Palko'n ko band karke dil se yaad karna,
main aur koi nahi, Tera viswaas hu'n.!!
"GITA is a life-giving substance with which the dormant soul comes to life again. Together with this it being the song of war, it is also the music of life." -
Sudhanshuji Maharaj
Friday, April 14, 2017
फूल बन कर
Sunday, April 9, 2017
Friday, March 31, 2017
जब समंदर मंथन
Friday, March 10, 2017
प्रकृति का नियम है
प्रकृति का नियम है कि हर कोई गतिमान है। चींटियों को देखिए। छोटी सी चीटी अँधेरे में भी दौड़ी चली आ रही है। अचानक आप लाइट जलाते है, देखकर आश्चर्य होता है कि अँधेरे में भी चीटियाँ दौड़ी चली जा रहीं है। शरीर से ज्यादा समान उठाकर जा रही होती है। छोटे से जीवन को भी पता है कि कर्म करते रहना है। खाली नहीं बैठना है। वस्तुतः जीवन गति का नाम है। कर्म करो पर सुव्यवस्थित होकर। शरीर की यात्रा तभी ठीक रहती है, जब कर्म से जुड़े रहते है। यदि कर्म से विमुख हो गये तो जीवन यात्रा ठीक से चलने वाली नहीं है।
Thursday, March 9, 2017
ध्यान रखो
Sunday, February 26, 2017
Fwd:
---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga <mggarga2013@gmail.com>
Date: Fri, Feb 24, 2017 at 12:20 PM
Subject:
To: mggarga@gmail.com
apne nam ka card banayen
From: Madan Gopal Garga <mggarga2013@gmail.com>
Date: Fri, Feb 24, 2017 at 12:20 PM
Subject:
To: mggarga@gmail.com
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Saturday, February 4, 2017
समय पर काम
Friday, February 3, 2017
"जीवन में कभी
"जीवन में कभी ऐसी घडियाँ भी आती है जब शब्द रुक जाते है, वाणी रुन्ध जाती है आप भाव विभोर होकर ईश्वर का धन्यवाद करना चाहते है, मगर वाणी साथ नहीं देती।
रोएं रोएं में कम्पन आ जाए, कुछ कह न पाएं , समझ न आए क्या कहुं ? मगर आभार व्यक्त करने का भाव जागृत हो जाए – वह प्रेम की अभिव्यक्ति है। भगवान की कृपाओं
के लिए जब शब्द न मिलें , होंठ हिलते रहें "प्रभु कैसे पुकारुं, क्या नाम दूं, किन शब्दों में तेरी प्रार्थना करुं। बुद्धि भी काम नहीं करती, बस तू मेरा है –केवल मेरा है" जब शब्द
मिल न पाएँ और आप कहना चाहते हों यह स्वरुप है प्रेम का। प्रेम में आप शब्द नहीं कह पाते, पर आपकी क्रियाओं में प्रेम है।"
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परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज
Thursday, February 2, 2017
प्रत्येक दिन
Saturday, January 21, 2017
Monday, January 9, 2017
Wednesday, December 28, 2016
Saturday, December 24, 2016
आत्म-निर्माण
आत्म-निर्माण की योजना और आत्म-विकास की योजना तब तक अधूरी है जब तक हम स्वंय के लिए कुछ नियम न बनाएँ, कुछ सिद्धान्त न बनाएँ ।
Wednesday, December 21, 2016
अंधेरे से बाहर आने
Sunday, December 18, 2016
Friday, December 16, 2016
कमजोर मनशक्ति ही
१. कमजोर मनशक्ति ही अंधविश्वास क़ा बहुत बड़ा कारण है
२. मनुष्य को ज्यादा भाग्यवादी नहीं बनना चाहिए वरना उसकी कर्म करने की शक्ति कमजोर हो जाती है और वह आगे नहीं बढ़ पाता
प्ररमपुज्य सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश
Thursday, October 20, 2016
भूतकाल को याद
भूतकाल को याद करने में और भविष्य की चिन्ता करने में समय बर्बाद न करें, क्योंकि भूतकाल वापिस आएगा नहीं और भविष्य अभी दूर है।
अपने वर्तमान का सदुपयोग करें। हर दिन को व्यवस्थित ढ़ग से व्यतीत करें।
अपने वर्तमान का सदुपयोग करें। हर दिन को व्यवस्थित ढ़ग से व्यतीत करें।
Wednesday, October 19, 2016
Wednesday, October 5, 2016
jigyasa aur samadhan: आज की युवा शक्ति जोकि भौतिक चकाचौंध
jigyasa aur samadhan: आज की युवा शक्ति जोकि भौतिक चकाचौंध: "जिज्ञासु गुरूदेव !आज की युवा शक्ति जोकि भौतिक चकाचौंध एवं विलासिता की ओर बढ़ती जा रही है उसे बचाने का उपाय क्या है ? महाराजश्री : विचारों..."
pl visit jigyasa aur samadhan
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वाणी की मधुरता
वाणी की मधुरता मित्रता बढ़ाती है और वाणी की कठोरता के कारण व्यक्ति अपनों से भी दूर हो जाता है।
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
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