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Monday, February 17, 2014

guruji ke aagami program

Sumiti Gupta Vjm


Sunday, February 16, 2014

Fwd: [Sarathi (Vjm mumbai mandal)] New photo

Fwd: [VISHWA JAGRITI MISSION] आप प्रेम के बिना जी नहीं सकते ! प्रेम को भक्ति...

 आप प्रेम के बिना जी नहीं सकते ! प्रेम को भक्ति...




Sumiti Gupta Vjm
आप प्रेम के बिना जी नहीं सकते ! प्रेम को भक्ति बनाकर भगवान तक लेकर जाओ ! उसी प्रेम को श्रद्धा बनाकर गुरु तक लेकर आओ ! वही आदर बनाकर मा बाप के लिए लेकर जाइये; उसी प्रेम को स्नेह बनाकर छोटो से जोड़ दीजिए ; ममता बनाकर बच्चों से जोड़ दीजिए ; वात्सल्य बनाकर छोटे शिशुओं के साथ जोड़ दीजिए ; दया बनाकर दुखियों के साथ जोड़ दीजिए ; उसीको सेवा बनाकर भगवान की भक्ति कर लीजिए प्राणीमात्र के लिए उसका रूप बदल दीजिए ; उसी प्रेम को आप समाधि में अपने अंदर उतारकर भगवान के चरणों तक पहुँचाईए और अपनी आत्मा का समर्पण परमात्मा के प्रति कर दीजिए! यह प्रेम आपको आसमान तक ले जाएगा भगवान तक जोड़ देगा ! इस प्रेम के रूपांतरण को ज़रूर सीख लें ; प्रेम हमारा रूपांतरित होता रहे , इस तरह से रूपांतरित हो अलग अलग रिश्तों में जाकर; दोस्तों में जाकर यह मित्रता बन जाए और कहीं कोई रिश्ता नहीं होता फिर भी रिश्ता होता है क्योंकि मॅन कहता है रिश्ते का कोई नाम नहीं , हृदय कहता है नाम देने की ज़रूरत नहीं यह मेरा बहुत कोई अपना सागा है इस से बड़ा सागा और कौन हो सकता है ! यह भावनैयें हमको ज़िंदा रखती हैं !



Fwd: [VISHWA JAGRITI MISSION] Live Discourse by His Holiness Sudhanshu ji Maharaj in Dubai, 7th Feb, 2014




Sumiti Gupta Vjm
Live Discourse by His Holiness Sudhanshu ji Maharaj in Dubai, 7th Feb, 2014
His Holiness inspires us to seek the Truth of life through his magical discourses. He teaches the tr...

V

Saturday, February 15, 2014

Fwd: [VISHWA JAGRITI MISSION] ये जानना बहुत जरुरी है ...



Sanjay Sahu
ये जानना बहुत जरुरी है ...
हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद। क्या कारण है |
हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई,
हमने रोटी खाई,हमने दही खाया
लस्सी पी ,दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|,ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय"
उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"|
उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है
" epigastrium "|
ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे
महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है।
ये बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है|

आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे"जठराग्न"।
|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है ।
ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |
यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है |

अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|

और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |

अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी| आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|

अब हमेशा याद रखें खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है,
एक क्रिया है जिसको हम कहते हे "Digation"और दूसरी है "fermentation"फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना|

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा|
जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|

ये तभी होगा जब खाना पचेगा|

यह सब हमें चाहिए|
ये तो हुई खाना पचने की बात
अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?

खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड (uric acid )

|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है,मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है

तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ,वो दवा खाओ यूरिक
एसिड कम करो|
और एक दूसरा उदाहरण खाना

जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे
LDL (Low Density lipoprotive)
माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol )|

जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )

हाई-बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ?

तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |

आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ?

तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |

इससे भी ज्यादा खतरनाक एक विष हे
वो है VLDL
(Very Low Density lipoprotive)|

ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है।
अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|

खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|

जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |

तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, कोई LDL -VLDL के नाम से कहे समझ लीजिए की ये
विष हे और ऐसे विष 103 है |

ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है |

मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,

कोई कहता हे मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |

कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है |

क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|

खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त ,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि

और

खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल
,LDL-VLDL|

और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !

पेट मे बनने वाला यही जहर जब
ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं !

तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|

क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है

महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |

आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे।

खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !!

"भोजनान्ते विषं वारी"

(मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर
है )

इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये !

अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???

तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना !

अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??

बात ऐसी है !

जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है !

पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट
का समय लगता है !

उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है !

(बुझती तो नहीं लेकिन बहुत
धीमी हो जाती है )

पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है !

तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं ।

तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !!

जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले)

उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने
लगता है उनको घंटे बाद
पानी पीना चाहिए !

अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ???

तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं !

अब आप पूछेंगे ये मिनट का calculation ????

बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं
तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है !

और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है !

तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है !

तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये !

इसका जरूर पालण करे !



chinta aur chita


jeev ko


Friday, February 14, 2014

Fwd: [AMRIT VANI ] bhala kardiya





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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 2/14/2014 05:41:00 PM

Fwd: [AMRIT VANI ] doosron kee





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Fwd: [AMRIT VANI ] guru ke charnon kee




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Tuesday, February 11, 2014

successful


प्रकृति से शिक्षा

प्रकृति से शिक्षा 

फूलों से तुम हँसना सीखो ,भोरों से तुम गाना !
सूर्य की किरणों से सीखो ,जगना  और जगाना !!

मुर्गे की बोली से सीखो ,प्रात काल उठ जाना !
महन्दी के पत्तों से सीखो ,पिस पिस कर रंग लाना !!

फलदार बृक्षों से सीखो ,फल पाकर झुक जाना !
पतझड़ बृक्षों से सीखो ,दुःख मैं न घबराना !!

अग्नि और धूएं से सीखो ,ऊंची मंजिल जाना !
मछली के जीवन से सीखो ,धर्म के हित मर जाना !!

पृथ्वी से सहनशक्ति सीखो, वायु से सर्व समाना !
जीवन मैं सब से कुछ सीखो जो चाहो कल्याना !!

जीवन की राहें से  



karm ka phal

tum devtaon


Monday, February 10, 2014

Fwd: [AMRIT VANI ] guru gyan


 guru gyan



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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 2/10/2014 06:50:00 PM

Fwd: [AMRIT VANI ] jo swayn achha


 jo swayn achha








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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 2/10/2014 06:52:00 PM

Fwd: [AMRIT VANI ] guru charnokee

 guru charnokee



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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 2/10/2014 06:53:00 PM

Saturday, February 8, 2014

Fwd: [AMRIT VANI ] वहीं से यात्रा शुरु

 वहीं से यात्रा शुरु




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ummid aise ho



seemaa sonawane

jeevan main

Fwd: [Anmol vachan] अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने



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Ramesh Kumar Mishra
अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने
ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये
यही है हमारी संस्कृति की पहेचान

( ०१ ) दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष !

( ०२ ) तीन ऋण -
देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण !

( ०३ ) चार युग -
सतयुग , त्रेतायुग ,द्वापरयुग , कलियुग !

( ०४ ) चार धाम -
द्वारिका , बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पूरी , रामेश्वरम धाम !

( ०५ ) चारपीठ -
शारदा पीठ ( द्वारिका )
, ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) , गोवर्धन पीठ
( जगन्नाथपुरी ) , श्रन्गेरिपीठ !

( ०६ ) चार वेद-
ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद !

( ०७ ) चार आश्रम -
ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास !

( ०८ ) चार अंतःकरण -
मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार !

( ०९ ) पञ्च गव्य -
गाय का घी , दूध , दही ,गोमूत्र , गोबर !

( १० ) पञ्च देव -
गणेश , विष्णु , शिव , देवी ,सूर्य !

( ११ ) पंच तत्त्व -
पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश !

( १२ ) छह दर्शन -
वैशेषिक , न्याय , सांख्य ,योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा !

( १३ ) सप्त ऋषि -
विश्वामित्र , जमदाग्नि ,भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप !

( १४ ) सप्त पूरी -अयोध्यापूरी ,मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , काशी ,
कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पूरी !

( १५ ) आठ योग -
यम , नियम , आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधी !

( १६ ) आठ लक्ष्मी -
आग्घ , विद्या , सौभाग्य ,अमृत , काम , सत्य , भोग एवं योग लक्ष्मी !

( १७ ) नव दुर्गा --
शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी ,चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी ,कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री !

( १८ ) दस दिशाएं -
पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण , इशान , नेऋत्य , वायव्य , अग्नि , आकाश एवं पाताल !

( १९ ) मुख्य ११ अवतार -
मत्स्य , कच्छप , वराह ,नरसिंह , वामन , परशुराम ,श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि !

( २० ) बारह मास -
चेत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक ,मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन !

( २१ ) बारह राशी -
मेष , वृषभ , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या !

( २२ ) बारह ज्योतिर्लिंग -
सोमनाथ , मल्लिकार्जुन ,महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम ,विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर ,भीमाशंकर ,नागेश्वर !

( २३ ) पंद्रह तिथियाँ -
प्रतिपदा ,द्वितीय , तृतीय ,
चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी ,दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावष्या !

( २४ ) स्मृतियां -
मनु , विष्णु , अत्री , हारीत ,
याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत ,कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य ,
लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !


आओ सभी भारतीय भाई बहन मिलके नया स्वच्छ भारत बनाये
ॐ शाति ।।
जय हिन्दी ।। जय संस्कृत ।।
जय भारत ।। वंदे मातरम् ।।